Components of Database Management System

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Components of Database Management System are :-

1. User:

DBMS में user को तीन प्रकार  में बाटा गया है।

(i) Application Programmer:-

यह वह  software developer है। जो कि database की application का निर्माण करते हैं।

(ii) DBA (database administrator):-

यह database के design construction व maintenance  के लिए जिम्मेदार होता है।

(iii) End User:-

यह database को access करते हैं। database की access एक terminal के द्वारा की जााती है।  तथा   database system द्वारा प्रदान की गई query language. जरिए access की जााती है ।

2. Software:-

Software के अंदर DBMS system , operating systems , application program तथा network software (यदि आवश्यकता हो तो ) आते है|

3. Hardware:-

Hardware की range single pc से computer के network तक हो सकती है। इसके साथ इसमे input output devices तथा विभिन्न storage devices का use होता है।

4. Data:-

Data numerical , alphabetic या graphics format में रखा जा सकता है।

Architecture of DBMS:-

DBMS design इसकी Architecture पर depend करता है basic Client/Server Architecture काउपयोग बड़ी संख्या में PC, web Server, database Server और network से जुड़े से निपटने के लिए किया जाता है

DBMS Architecture इस बात पर निर्भर करता है की User अपने request को पुरा करने के लिए Database से कैसे जुड़ते है

Types of DBMS Architecture:

Database Architecture को एकल स्तरीय (single tier) या बहु स्तरीय (multi-tier) के रूप में देखा जा सकता है।  लेकिन logically, Database Architecture दो प्रकार की होती है जैसे: 2-tier architecture और 3-tier architecture

1-Tier Architecture

  • इस architecture में, Database सीधे user के लिए उपलब्ध है।  इसका अर्थ है कि user सीधे DBMS उपयोग कर सकता है।
  • यहां किए गए changes सीधे Database पर ही किए जाएंगे।  यह end users के लिए handy tools प्रदान नहीं करता है।
  •  1-tier architecture का उपयोग local application के development के लिए किया जाता है, जहां programmers सीधे quick response के लिए Database के साथ communicate कर सकते हैं।

2-Tier Architecture

  • 2-tier architecture basic client-server के समान है।2-tier architecture में, client end पर application सीधे सर्वर साइड पर Database के साथ communicate कर सकते हैं।  इस interaction के लिए, API’s जैसे की: ODBC, JDBC का उपयोग किया जाता है।
  • User interface और application programs client-side पर चलाए जाते हैं।
  • Server side functionalities को प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है  जैसे की : query processing और transaction management।
  • DBMS के साथ संवाद करने के लिए,  client-side application server side के साथ एक connection स्थापित करता है।

3-Tier Architecture

  • 3-Tier architecture में client और server के बीच एक layer होती है।  इस architecture में, Client Server से सीधे communicate नहीं कर सकता है।
  • Client-End पर application एक application server के साथ interact करता है जो आगे Database सिस्टम के साथ communicate करता है।
  • End user को application server से परे Database के existence के बारे में कोई पता नहीं है। Database में application से परे किसी भी अन्य user के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है।
  • 3-tier architecture का उपयोग बड़े web application के मामले में किया जाता है।

 

 

 

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