Multiplexing Techniques & its types

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Multiplexing

Multiplexing एक ऐसी Technique है जिसके use से दो या दो से अधिक Analog or digital signals को एक साथ एक ही Communication medium के use कर Send किया जा सकता है। Multiplexing के use से विभिन्न signal किसी Communication medium को आपस में Share करते हैं। Multiplexing के Technique को Allow करने के लिए जिस Hardware device का use किया जाता है| उसे Multiplexer कहते हैं। Multiplexer के माध्यम से Broadcast किये गए signal को दूसरे छोर पर D-multiplex के द्वारा Receiver किया जाता है| उसके बाद उनमें से सही signal की पहचान करके उन्हें सही स्थान पर Send किया जाता है।

Types of Multiplexing

Frequency Division Multiplexing

Frequency Division Multiplexing में प्रत्येक के signal को मुख्य Communication medium के भीतर एक Sub-channel या Frequency में divide कर दिया जाता है। मतलब की इसमें प्रत्येक signal के लिए एक Frequency होता है। Radio broadcast frequency division multiplexing का एक Example है इसमें अलग-अलग Radio station का Program अलग-अलग Frequency पर एक साथ Available होता है और कोई भी users आसानी से अपने Radio device  की Frequency को बदलकर किसी भी Radio station के Program को सुन सकता है।

Wavelength Division Multiplexing

इसका use अलग-अलग Wavelengths वाले Optical signal को एक साथ मिलाकर बहुत ही High speed वाले Optical fiber cable के help से signals को Send और Receive करने के लिए किया जाता है। इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें एक ही समय पर optical fiber cable के help से signals को Receive भी किया जा सकता है और उन्हें Send भी जा सकता है। Internet connection के लिए use होने वाले Broadband में इसका बहुत ज्यादा use होता है।

Time Division Multiplexing

Time Division Multiplexing (TDM ) मुख्य रूप से Digital signals पर Allow होता है लेकिन Analog signals पर भी इसे Allow किया जा सकता है| TDM में Share चैनल समय Slot के माध्यम से अपने users के बीच Divided है| प्रत्येक users को provide किए गए समय Slot के भीतर ही Data transmit कर सकता है|

Digital signals को Frame में Divide किया जाता है| Time Slot के बराबर यानी एक Optimum size का Frame जो कि दिए गए Time Slot में Broadcast किया जा सकता है| TDM synchronized मोड में काम करता है| दोनों सिरों, यानी Multiplex और D-multiplex को समय पर Synchronized किया जाता है और दोनों एक साथ अगले Chanel पर Switch करते हैं|

जब Chanel A अपने Frame को एक छोर पर पहुंचाता है| तो D-multiplex Chanel A को दूसरे छोर पर Media provide करता है| जैसे ही Chanel A का Time Slot End होता है| यह Side Chanel B पर Switch हो जाता है| दूसरे छोर पर D-multiplex एक Synchronized तरीके से work करता है और Switch B को Media provide करता है| विभिन्न Chanel के Signal interleaved तरीके से Travel करते हैं|

Code Division Multiplexing

इसमें Work तो उपरोक्त दोनों Multiplexing की तरह ही होता है परंतु इसका Work करने की Technique अन्य दोनों से काफी Different है| जैसे TDM में समय में Divide different channel को Time दे देते है जबकि FDM में Frequency में Divide different bandwidth में divide प्रत्येक channel को एक Frequency को दे देता है| और वह उसी Frequency में Communication करता है। लेकिन इस Technique में code को Different station के अनुसार divide करता है |

Use of Multiplexing

  • Multiplexing के use से signal को Send करने वाला  Sender और Signal को Receive करने वाला  Receiver दोनों एक ही Communication medium जैसे की कोई Wire या Cable के माध्यम से एक समय दो या दो से अधिक signal या Message का आदान-प्रदान एक दूसरे के साथ कर सकता है।
  • जब दो या दो से अधिक signals किसी एक ही Communication medium को Communication के लिए आपस में Share करती है| तो उन signal के बीच आपस में Collision होने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। लेकिन Multiplexing की Concept को इस तरह से Design किया गया है कि यह signals के बीच किसी प्रकार के Collision की परिस्थिति से बचाता है और बिना किसी Problem के signals के Flow को Communication medium में सुचारू रूप से करवाने में सहायता करता है।

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