What is Client Server Architecture?

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Client Server Architecture (client / server) एक network architecture है जिसमें network पर प्रत्येक computer या तो client या server होता है। जिसमें server client द्वारा उपभोग किए जाने वाले अधिकांश संसाधनों और सेवाओं को host करता है, distribute करता है और manage करता है। इस प्रकार के architecture में network या internet connection पर central server से जुड़े एक या अधिक client computer होते हैं।

Client / Server architecture को network computing model या client / server network के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि सभी अनुरोध और सेवाएं network पर distribute की जाती हैं। Server Computer या disk drive (file server), printer (print server), या network transportation (network server) के प्रबंधन के लिए समर्पित प्रक्रियाएं हैं। Client PC या workstation हैं जिन पर users applications चलाते हैं। Client संसाधनों के लिए server पर भरोसा करते हैं, जैसे file, device और यहां तक ​​कि processing power.

जहाॅ पर computers की संख्या अधिक होती हैं इस प्रकार के environment के लिये client server architecture को तैयार किया गया था। For example:- बहुत सारे computers को आपस मे network technique के द्वारा जोड दिये जाते है।

इनमे किसी एक Computer को Workstation बना दिया जाता है। Server पर इन सभी Computers की files save होती है इस model को Client Server Model कहते है। इस Model मे एक या एक से अधिक computer client होते है तथा Server एक होता है। इस model मे client अपनी requested network के द्वारा server पर भेजता है तथा Server उस request को Response करता है। इस तरह का network संसाधनो का साझा उपयोग करने मे मदद करता है। इस तरह के model मे हम hardware तथा software को Share  कर सकते है। For example – Printer को Server से Connect कर देते है तो फिर किसी भी workstation से किसी भी फाइल का printout निकाल सकते है।

क्लाइंट प्रक्रिया (Client Process)

Client एक computer system हैं जो किसी तरह के network के जरिय अन्य computers पर server excess करता है client एक ऐसी प्रक्रिया है जो server को message भेजता है और server उस कार्य को पूरा करता है। Client Program आमतौर पर application के User interface हिस्से का प्रबंधन करते हैं, Client-आधारित प्रक्रिया उस application का front-end है जिसे user देखता है और उससे संपर्क करता है। Client Process स्थानीय संसाधनों का management भी करती है जो users monitor, keyboard, workstation CPU जैसे interect करता है। Client workstation के प्रमुख तत्वों में से एक Graphical User Interface (GUI) है।

सर्वर प्रक्रिया (Server Process)

Client Server Architecture मे, Server Process एक ऐसा program है, जो क्लाइंट द्वारा request किये गये कार्य को पूरा करता है। आमतौर पर सर्वर प्रोग्राम क्लाइंट प्रोग्राम से रिक्वेस्ट प्राप्त करता है तथा क्लाइंट को Response करता है। Server आधारित process network की दूसरी machine पर भी चल सकता है। यह server हाॅस्ट operating system या network file server हो सकता है। Server को फिर File System सेवाएं तथा application प्रदान किया जाता है तथा कुछ स्थितियो मे कोई दूसरा desktop machine application सेवाएं प्रदान करता है।

Server process एक software engine के रूप में कार्य करती है जो शेयर संसाधनों जैसे database, printer, communicating link या उच्च संचालित process प्रबंधित करती है। Server process back – end कार्यों को execute करती है जो समान अनुप्रयोगों के लिए आम हैं।

Client / Server Architecture के उदाहरण निम्न हैं।

Two tier Architecture:-

Two tier Architecture वह जगह है जहां कोई client बिना किसी हस्तक्षेप के किसी सर्वर पर सीधे बातचीत नहीं करता है, यह आमतौर पर छोटे वातावरण (50 से कम Users) में उपयोग किया जाता है।  Two tier Architecture में, User interface, user के desktop environment पर रखा जाता है और database management system सेवाएं आमतौर पर एक server में होती हैं जो एक से अधिक शक्तिशाली machine होती है जो कई clients को सेवाएं प्रदान करती है। सूचना प्रोसेस user system interface environment और database management server environment के बीच विभाजित है।

Three tier Architecture:-

Two tier Architecture की कमी को दूर करने के लिए Three tier Architecture को बनाया गया हैं| Three tier Architecture में, उपयोगकर्ता सिस्टम इंटरफ़ेस क्लाइंट पर्यावरण और डेटाबेस प्रबंधन सर्वर वातावरण के बीच एक मिडलवेयर का उपयोग किया जाता है। इन मिडलवेयर को विभिन्न तरीकों से कार्यान्वित किया जाता है जैसे कि लेनदेन प्रसंस्करण मॉनीटर, संदेश सर्वर या application server. Middleware Queuing, application execution और database staging का कार्य करता है। इसके अलावा middle ware प्रगति पर काम के लिए scheduling और priority जोड़ता है। Three tier client/ server Architecture का उपयोग बड़ी संख्या में users के प्रदर्शन में सुधार के लिए किया जाता है और two tier Architecture की तुलना में flexibility में भी सुधार करता है।

Advantages of Client Server Architecture (क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर के लाभ):-

  • प्रत्येक Client को Terminal Mode या Processor में Login करने की आवश्यकता को समाप्त करने के लिए Desktop Interface के माध्यम से कॉर्पोरेट जानकारी तक पहुंचने का अवसर दिया जाता है।
  • Client/Server Model के लिए उपयोग किया जाने वाला Application Hardware Platform या हकदार सॉफ़्टवेयर (ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ़्टवेयर) की तकनीकी पृष्ठभूमि के बावजूद बनाया गया है जो कंप्यूटिंग पर्यावरण प्रदान करता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को क्लाइंट्स और सर्वर (डेटाबेस, एप्लिकेशन और संचार सेवाओं) की सेवाएं प्राप्त करने के लिए मजबूर किया जाता है।
  • क्लाइंट-सर्वर उपयोगकर्ता प्रोसेसर के स्थान या तकनीक के बावजूद सीधे सिस्टम में लॉग इन कर सकते हैं।
  • क्लाइंट-सर्वर आर्किटेक्चर को नेटवर्क में एकीकृत स्वतंत्र कंप्यूटरों के बीच फैलाने वाली जिम्मेदारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला मॉडल वितरित किया जाता है। इसलिए, क्लाइंट को अप्रभावित बनाते समय सर्वर को प्रतिस्थापित करना, मरम्मत करना, अपग्रेड करना और स्थानांतरित करना आसान है। इस अनजान परिवर्तन को Encapsulation के रूप में जाना जाता है।
  • सर्वरों के पास बेहतर नियंत्रण पहुंच और संसाधन हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल अधिकृत क्लाइंट डेटा तक पहुंच या कुशलतापूर्वक उपयोग कर सकें और सर्वर अपडेट प्रभावी ढंग से प्रशासित होते हैं।
  • फ्रंट एंड टास्क और बैक-एंड टास्क में प्रोसेसर की गति, मेमोरी, डिस्क की गति और क्षमताओं, और इनपुट / आउटपुट डिवाइस जैसे कंप्यूटिंग के लिए मौलिक रूप से अलग-अलग आवश्यकताएं हैं।
  • क्लाइंट-सर्वर सिस्टम की एक महत्वपूर्ण विशेषता स्केलेबिलिटी है। उन्हें क्षैतिज या लंबवत स्केल किया जा सकता है। क्षैतिज स्केलिंग का मतलब केवल कुछ मामूली प्रदर्शन प्रभाव के साथ क्लाइंट वर्कस्टेशंस को जोड़ना या निकालना है। लंबवत स्केलिंग का मतलब है एक बड़ी और तेज़ सर्वर मशीन या मल्टीसेवर में माइग्रेट करना।

Internet Connectivity:-

Connectivity से आशय Internet से जुङने के लिए Use होने वाले तरीके से है | Internet किसी भी प्रकार का कोई बिज़नेस प्रोडक्ट नहीं है बल्कि यह इन्फॉर्मेशन का ग्रुप है, जिसका प्रयोग यूजर अपनी आवश्यकता के अनुसार इन्फॉर्मेशन को कलेक्ट करने के लिए करता है | इंटरनेट एक ऐसी जगह है जहां दुनिया की हर जानकारी सिर्फ एक क्लिक से आपको मिल जाएगी | इन्टरनेट का कोई भी मालिक नहीं होता है इसके कारण इंटरनेट को यूज़ करने के लिए कुछ विशेष नियम व प्रोटोकॉल बनाये गए है , जिसे हर यूजर को मानना पड़ता है और उसे इसी रूल्स के हिसाब से इंटरनेट प्रयोग करना होता है |

इंटरनेट को यूज़ करने के लिए सबसे पहले आपको  किसी सर्वर से जुड़ना होता है, इंटरनेट सर्वर एक ऐसा सिस्टम कहा जा सकता है जो क्लाइंट यानि यूजर के द्वारा आने वाली रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट करके उसके द्वारा मांगी गयी जानकारी उपलब्ध कराता है | इन्टरनेट की सेवाए लेने के लिए पहले आपको इन्टरनेट से कनेक्ट होना पड़ता है और इसके लिए आपको इन्टरनेट कनेक्शन लेना पड़ता है |ऐसी सेवा कई कंपनियां देती है|

ऐसी कंपनियां जो इन्टरनेट की सर्विस प्रोवाइड कराती है ISP (internet service provider) कहलाती है | इन्टरनेट का प्रयोग करने के लिए आपको ISP से कनेक्शन लेना होता है | जब आप इस कंपनी का नेटवर्क यूज़ करते है ,तो आपको इसके लिए आवश्यक फीस जमा करनी होती है ,इसी के साथ आपका सिस्टम उस कंपनी के सर्वर के साथ जुड जाता है | हर नेटवर्क की जिम्मेदारी होती है की जब वह किसी यूजर को सर्विस प्रोवाइड कराता है ,तो नेटवर्क से सम्बंधित कोई भी परेशानी आने पर उसे दूर करे | इंटरनेट से जुड़ने के पहले यह विचार करना पड़ता है की आप किस लेवल पर इंटरनेट यूज़ करना चाहते है, इंटरनेट से जुड़ने के लिये कई प्रकार के कनेक्शन उपलब्ध है जो निम्नलिखित है –

इंटरनेट से जुडने के लिये कई तरीके है। इसके लिये आपको अपना कम्प्यूटर किसी सर्वर से जोडना होता है। इंटरनेट सर्वर कोई ऐसा कम्प्यूटर है, जो दूसरे कम्प्यूटरो से भेजी गई प्राथनाओ को स्वीकार करता है और उन्हे उनकी जानकारी उपलब्ध कराता है। ये सर्वर कुछ अधिकृत कंपनियो द्वारा स्थापित किये जाते है, जिन्हे इंटरनेट सेवा प्रदाता कहा जाता है। ऐसी सेवा देने वाली अनेक कंपनीयां है, आपके पास किसी इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी का कनेक्शन होना चाहिए। जब आप अपने क्षेत्र मे कार्य करने वाली किसी इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी से आवेदन करते है और आवश्यक शुल्क जमा करते है, जिसके द्वारा आप उस कंपनी के सर्वर से अपने कम्प्यूटर को जोड सकते है।

Types of Internet Connection:-

  • Dial up Connection
  • ISDN Connection
  • Leased line connection
  • VSAT Connection
  • Broadband Connection
  • Wireless Connection
  • USB Modem Connection

1. PSTN (Public Services Telephone Network)

सामान्य telephonic line द्वारा, जो आपके computer को dial-up connection के माध्यम से internet सेवा प्रदाता company के server से जोड देती है। इसलिए इसे Dial up connection भी कहा जाता हैं | कोई Dial up connection एक अस्थायी connection होता है, जो आपके computer और ISP server के बीच बनाया जाता है। डायल अप connection modem का उपयोग करके बनाया जाता है, जो telephone line का उपयोग ISP Server का नंबर dial करने मे करता है। ऐसा connection सस्ता होता है, और इसकी speed कम होती हैं| इसकी स्पीड kbps (kilo byte per second) तथा mbps (mega byte per second) में मापी जाती हैं|

2. ISDN (Integrated services digital network)

यह Dial up connection के समान ही होता हैं परन्तु यह महंगा होता हैं और इसकी speed Dial up से ज्यादा होती हैं |

3.  Leased line connection

Leased line ऐसी direct telephone line होती है, जो आपके computer को ISP के server से जोडती है। यह internet से direct connection के बराबर है और 24 घंटे available रहती है। यह बहुत तेज लेकिन महॅगी होती है।

4.V-SAT (वी-सैट)

V-SAT Very Small Apertune Terminal का संक्षिप्त रूप है। इसे Geo-Synchronous Satellite के रूप मे वर्णन किया जा सकता है जो Geo-Synchronous Satellite से जुडा होता है तथा telecommunication एवं information service, जैसे- audio, video, voice द्वारा इत्यादि के लिये प्रयोग किया जाता है। यह एक विशेष प्रकार का Ground Station है जिसमे बहुत बडे एंटीना होते है। जिसके द्वारा V-SAT के मध्य सूचनाओ का आदान प्रदान होता है, Hub कहलाते है। इनके द्वारा इन्हे जोडा जाता है।

5. Broadband Connection

यह वह line होती हैं जो ISP द्वारा भेजी जाती हैं इसके बाद उस line को modem और telephone line से जोड़ दिया जाता हैं

यह एक private network होता हैं जिसका कोई न कोई owner अवश्य होता हैं इसलिए इस network का प्रयोग केवल वही व्यक्ति कर सकता हैं जिसने यह connection लिया हैं |
जैसे – MTNL, BSNL, sify, idea आदि वह companies हैं जो broadband की सुविधा देती हैं |

6. Wireless connection

Wireless वह कनेक्शन होता हैं जिसमे केबल का प्रयोग नहीं किया जाता हैं जैसे – wifi इसे चलाने के लिए किसी केबल की आवश्यकता नहीं होती हैं wifi कनेक्शन के लिए केवल Router की आवश्यकता होती हैं|

7. USB Modem connection

इस connection के लिए modem की आवश्यकता नहीं होती हैं USB device के माध्यम से यह connection स्थापित किया जाता हैं इसमें Sim card के द्वारा internet connection बनाया जाता हैं USB Modem में sim card लगाने के बाद computer से connect करने पर net चालू हो जाता हैं |
जैसे – Net Sector एक USB modem हैं इसे कई कंपनी द्वारा बनाया गया हैं idea, reliance, Airtel, Tata docomo, jio आदि |

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